
फेसबुक, नरेंद्र मोदी ऐप और कांग्रेस पार्टी के ऐप से डेटा लीक की घटनाओं के बाद हर कोई सजग हो गया है। यह सही है कि डेटा की पूरी जानकारी ऐप कंपनी को होती है, और उसे वह थर्ड पार्टी को देती है। उसकी पॉलिसी में इन बातों का जिक्र भी होता है। लेकिन पॉलिसी का पालन नहीं होने पर भी यूजर कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि देश में डेटा प्रोटेक्शन कानून अभी बना ही नहीं है। ऐप के जरिए कंपनियों की पहुंच आपके मोबाइल फोन के माइक और फोटो गैलरी तक हो जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आम आदमी के डेटा का इस्तेमाल तब से होने लगा था जब से उसने स्मार्टफोन में ऐप डाउनलोड करना शुरू किया।
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