
उत्तर प्रदेश में हो रहे लोकसभा उपचुनाव में बसपा और सपा के एक साथ आ जाने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। 23 साल बाद दोनों पार्टियां साथ आई हैं। यह गठबंधन बीजेपी की मुश्किल बढ़ा सकता है। अगर 2017 के विधानसभा चुनाव में बसपा को मिले वोट सपा कैंडिडेट को ट्रांसफर होते हैं तो बीजेपी दोनों सीटें हार सकती है। वहीं, अगर 2014 की मोदी लहर बरकरार रही तो यह मुमकिन नहीं होगा। दोनों सीटों पर 11 मार्च को वोट डाले जाएंगे। नतीजे 14 मार्च को आएंगे।
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