
पिछले कुछ दिनों से नेशनल मीडिया में चल रहे इवेंट्स को देखा जाए तो ऐसा महसूस होता है कि वही पुराने शो रिपीट किए जा रहे हैं। ऐसा लगता है कि नीरव मोदी द्वारा भारतीय बैंकों में किए गए फ्रॉड को बताने वाला कोई भी खुलासा अब बाकी नहीं रह गया। इस तरह की घटनाएं इंडियन इकोनॉमी के लिए कांटे की तरह हैं और यह पॉलिटिक्स में आरोप-प्रत्यारोप के गेम को उकसाने वाली हैं। और इन्हीं सब झूठे प्रोपेगेंडा के जरिए कॉमन मैन शायद मिसलीड हो रहा है।
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