
अयोध्या विवाद पर बुधवार को फिर एक बार सुनवाई होगी। कोर्ट इस विवाद पर लगातार सुनवाई की तारीख तय कर सकता है। उधर, इस केस के पक्षकारों का कहना है कि अब सुप्रीम कोर्ट से ही उम्मीद है, इस मामले को और नहीं टाला जाना चाहिए, जल्द से जल्द निर्णय सुनाने की जरूरत है। पिछली बार 1 फरवरी को इस मामले की सुनवाई हुई थी, तब वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस और गीता सहित 20 धार्मिक पुस्तकों से इस्तेमाल किए तथ्यों का अंग्रेजी में ट्रांसलेशन न होने की वजह से सुनवाई टालनी पड़ी थी। सुनवाई के दौरान पिटीशनर्स के वकील ने कहा था कि अयोध्या विवाद लोगों की भावनाओं से जुड़ा है। इस पर चीफ जस्टिस बोले- ऐसी दलीलें मुझे पसंद नहीं, यह सिर्फ भूमि विवाद है।
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