
गोरखपुर सीट पर 29 साल से गोरखनाथ मठ का कब्जा था। पहले तीन बार महंत अवैद्यनाथ और आखिर के 5 बार लगातार योगी आदित्यनाथ यहां से सांसद रहे। पर 14 मार्च को उपचुनाव के नतीजों ने नया इतिहास लिख दिया। भाजपा अपने सीएम की सीट हार गई। भाजपा के इस अभेद्य दुर्ग को 2 साल पहले एक आंदोलन से पैदा हुए नेता ने भेद दिया। यह निषाद आंदोलन था और इसके नेता 29 साल के प्रवीण निषाद हैं। इस जीत में अखिलेश यादव की सोशल इंजीनियरिंग की भी भूमिका रही है, जिसमें उन्होंने पिछड़ों और मुस्लिमों को जोड़ा। इसके लिए उन्होंने गोरखपुर में निषाद और पीस पार्टी से हाथ मिलाया, बसपा का समर्थन हासिल किया। पढ़ें हार की चार बड़ी वजहें।
आज की ताज़ा ख़बरें पढ़ने के लिए दैनिक भास्कर ऍप डाउनलोड करें
from Today's Top Hindi News Headlines From India and World - Dainik Bhaskar http://ift.tt/2pm0GCr
No comments:
Post a Comment