
'कभी नीम नीम कभी शहद शहद...' (फिल्म युवा), 'हम हैं इस पल यहां...' (किसना), 'माही वे...' (कल हो ना हो), 'सोजा ज़ारा...' (बाहुबली-2) जैसे गानों के जरिए श्रोताओं के दिल में उतर जाने वाली मधुश्री को संगीत जगत में रातोंरात लोकप्रियता नहीं मिली। उन्हें काफी स्ट्रगल करना पड़ा। यहां तक कि अपना बर्थनेम सुजाता भट्टाचार्य को बदलकर मधुश्री रखना पड़ा। 1999 में उनका एलबम आया, उसके बाद दो वर्षों तक कई संगीतकारों के पास गईं, पर कहीं बात नहीं बनीं। खैर, 2001 में जावेद अख्तर ने मधुश्री को राजेश रोशन से मिलवाया और उन्होंने पहला ब्रेक 'मोक्ष' में 'मोहब्बत ज़िंदगी है...' गाने से दिया।
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