
जस्टिस लोकुर ने अपने फैसले में कहा कि- "30 साल तक ये भ्रम कायम रहा कि लक्ष्मी नामक महिला इस केस की याचिकाकर्ता है। लक्ष्मी निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कभी सामने आई। पिछले 11 साल में तो उसके पावर ऑफ अटॉर्नी भी अदालत के सामने नहीं आए।’ लक्ष्मी की ओर से इस आधार पर केस दायर किया गया था कि बेंगलुरू के कौडेनाहल्ली की विवादित जमीन संरक्षित भूमि है। इसलिए सरकार ये जमीन सेंट एनी एजुकेशन सोसायटी के नाम नहीं कर सकती। इस दलील से लक्ष्मी जीतती भी रही।
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