
जांच में पता चला कि कंपनी ने 2010-11 में हैदराबाद की अक्षम एसोशिएट चाटर्ड एकाउंटेंट से आॅडिट कराया था। वहीं 2011-12 के आॅडिट के लिए कंपनी ने अचानक आॅडिटर बदल दिया। इस वित्तीय वर्ष का आॅडिट लखनऊ की कंपनी को सौंपा गया। रिपोर्ट में फर्म ने लेबर चार्ज के तौर पर भुगतान किए गए 208.23 करोड़ रु. पर कोई कमेंट नहीं दिया। रेवेन्यू को 840.08 करोड रु.से घटा कर 805.80 करोड़ दिखाया गया। स्टॉक की बढ़ोतरी पर भी कोई कमेंट नहीं दिया गया था।
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