
मेहुल चौकसी की कंपनी गीतांजलि जेम्स का कर्ज फंसने के कारण जनवरी-मार्च तिमाही में बैंकों का एनपीए कम से कम 8,000 करोड़ रुपए बढ़ने वाला है। गीतांजलि ने जनवरी से मार्च के दौरान कर्ज पर ना तो ब्याज दिया है, ना ही मूल राशि का कोई हिस्सा लौटाया है। एक तिमाही में ईएमआई नहीं मिलने पर बैंकों को वह कर्ज एनपीए घोषित करना पड़ता है। इसके एवज में उन्हें मुनाफे का एक हिस्सा अलग रखना होगा, जिसे प्रोविजनिंग कहते हैं। इससे बैंकों का मुनाफा भी घटने के आसार हैं।
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