
कई लोग कालसर्प दोष से पीड़ित होते हैं और उससे नुकसान उठाते हैं। ज्योतिष में इस दोष को सर्प दोष कहा गया है लेकिन कालांतर में इसका नाम कालसर्प दोष पड़ गया। ये दोष कई तरह का होता है। 12 प्रमुख कालसर्प दोष होते हैं। जब कुंडली में राहु और केतु के बीच सारे ग्रह आ जाएं तो उसे कालसर्प दोष कहा जाता है। राहु मुख है और केतु उसकी पूंछ। मुंह और पूंछ के बीच जब सारे ग्रह आ जाएं तो ये सांप जैसी आकृति कुंडली में बनाते हैं।
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