
ओम एक शब्द नहीं है ये एक नाद या मंत्र है जिसका उपयोग हमारे ऋषि-मुनि ध्यान व स्वास्थ्य लाभ के लिए करते थे। ओम अ, ऊ व म से मिलकर बना है और इसे सांस लेते व छोड़ते हुए इसी तरह से उच्चारित करना चाहिए। इसे कम से कम रोज 10 से 11 बार बोलना चाहिए। इससे पूरे शरीर में एक विशेष कंपन होता है, जो हमारे शरीर की नाड़ियों को खोलता है। इससे हमारी बॉडी पर काफी अच्छा असर पड़ता है।
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