
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के ज्यादातर प्री-पोल सर्वे में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया गया। अगर ये सर्वे सही साबित होते हैं तो जनता दल सेक्युलर निर्णायक भूमिका में होगी। दो स्थितियों में भाजपा और कांग्रेस को जेडीएस से चुनौती मिल सकती है। पहली- पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीएस 16 ऐसी सीटों पर हारी थी, जहां मार्जिन 5000 से कम था। इस बार बसपा, एनसीपी, टीआरएस और ओवैसी की एआईएमआईएम की मदद से अगर वह इन सीटों को जीत में तब्दील कर लेती है तो उसकी सीटों का आंकड़ा बढ़ जाएगा। दूसरी- पिछले तीन चुनावों का ट्रेंड देखें तो किसी भी पार्टी के वोट शेयर में सिर्फ 1 से 4 फीसदी के उछाल पर ही सीटों का बड़ा फायदा होता है। ऐसे में जेडीएस के मामले में यह उछाल आया तो किसी को भी स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा।
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