
23 जून को गायत्री जयंती है। गायत्री माता के लिए शास्त्रों में लिखा है कि सर्वदेवानां गायत्री सारमुच्यते जिसका मतलब है गायत्री मंत्र सभी वेदों का सार है। इसलिए मां गायत्री को वेदमाता कहा गया है। वेद का अर्थ है - ज्ञान। इस ज्ञान के चार प्रकार हैं। ऋक्, यजु, साम और अथर्व। ज्ञान के ये चारों रूप हर मनुष्य से किसी न किसी तरह जुड़े हैं। इनमें ऋक् - कल्याण, यज्ञ - पौरूष, साम - क्रीड़ा और अथर्व - अर्थ भाव से संबंधित है। बचपन, युवा, गृहस्थ और संन्सासी जीवन में क्रमश: क्रीडा, अर्थ, पौरूष और कल्याण की अवस्था देखी जाती है। गायत्री संहिता के अनुसार, ‘भासते सततं लोके गायत्री त्रिगुणात्मिका॥’यानी गायत्री माता सरस्वती, लक्ष्मी एवं काली का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन तीनों शक्तियों से ही इस परम ज्ञान यानी वेद की उत्पत्ति होने के कारण गायत्री को वेद माता कहा गया है।
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