
सुश्रुत संहिता के अनुसार गृहस्थ व्यक्ति को 32 ग्रास (बाइट) जितना ही भोजन करना चाहिए। इससे ज्यादा भोजन करने से व्यक्ति रोगी होने लगता है और धीरे-धीरे उम्र भी कम होने लगती है। वहीं पद्म, स्कंद, विष्णु और ब्रह्मवैवर्तपुराण के साथ अन्य संहिताओं और स्मृतिग्रंथों में भी भोजन से जुड़े महत्वपूर्ण नियम बताए गए हैं। जिनका ध्यान रखा जाए तो निरोगी रहेंगे, उम्र बढ़ेगी और घर में दरिद्रता भी नहीं आएगी। महाभारत में लिखा है कि भोजन से बुद्धि में सात्विक, राजसिक और तामसिक गुण आते हैं। इसलिए भोजन संबंधी नियमों को ध्यान में रखना चाहिए जिससे बुद्धि और मन पवित्र रहेंगे और कोई गलत काम नहीं होगा।
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