
उज्जैन। कहते हैं जन्म, मरण और शादी ये तीन दिन ऐसे होते हैं, जो भगवान तय करके ही हमें इस संसार में भेजते हैं। जिसने भी जन्म लिया है। उसकी मृत्युु का दिन निश्चित है। इसके बावजूद मतलब, चाहत या फायदे के लिए कई लोग मौत की सच्चाई को अनदेखा करते हैं। ईगो को सिर पर चढ़ाकर ज़िंदगी गुजारते हैं, बल्कि शास्त्रों में अहं व उससे पैदा होने वाले दोषों से दूरी बनाने के लिए मृत्यु को याद रखना भी बेहतर तरीका बताया गया है। हिन्दू पौराणिक मान्यताओं में दो अलग-अलग युगों में रावण व कंस भी ऐसे पात्र हैं, जो घमंड मेंके मद में चूर होने से मिली मृत्यु के उदाहरण है। वहीं, सच यह भी है कि साधारण इंसान के लिए अहंकार को पहचानना आसान नहीं होता, लेकिन संत कबीर ने अंहकार को मन में आने से रोकने व अनचाहे दु:खों से बचने के लिए अपने सटीक दोहों में जो बातें बताई हैं। उनके जरिए काल या मृत्यु को याद ही नहीं रखा जा सकता है, बल्कि बात, सोच और कामों में सही व गलत के फर्क को बेहतर ढंग से समझा भी जा सकता है। संत कबीर ने मृत्यु के अटल सत्य को सामने रख जो सूत्र बताए हैं वो इस प्रकार...
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