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Saturday, 24 March 2018

कल्पेश याग्निक का कॉलम: हिन्दुस्तान में क्यों नहीं है सदर-ए-ताउम्र रहने की ख़ौफनाक ख्वाहिश पर रोक?

दुनिया भर में चीन और फिर रूस के हुक्मरानों को हैरत से देखा जा रहा है।पहले शी जिनपिंग सामने आए। चीन का कायदा बदल दिया। बंदिश तोड़ डाली। जब तक चाहेंगे, प्रेसीडेंट बने रहेंगे। यानी सदर-ए-ताउम्र। ज़िंदगी भर प्रेसीडेंट। सद्दाम हुसैन ने सबसे पहले खुद को ईराक का ‘सदर-ए-ताउम्र’ टाइटल दिया था। सदर वैसे प्रेसिडेंट या अध्यक्ष को कहते हैं - लेकिन इसके मायने सुप्रीम लीडर है।

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