
देश में दलित राजनीति उफान पर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी दलितों के लिए उपवास कर रहे हैं। अमित शाह कहते हैं कि पार्टी दलितों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलेगी। बसपा सुप्रीमो मायावती धमकाने के अंदाज में कह रही हैं कि बीजेपी दलितों के साथ खेलना बंद कर दे, वरना उसकी हालत वैसी हो जाएगी जैसी इमरजेंसी के बाद कांग्रेस की हुई थी। पार्टियों की दलितों के प्रति चिंता समझ में आती है। वजह 2019 का लोकसभा चुनाव है। सभी को डर है कि देश की आबादी के 16 प्रतिशतों दलित उनसे नाराज न हो जाए। वहीं दलित अपने हक के लिए सड़कों पर हैं। एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के विरोध में भारत बंद कर दिया। जमकर हंगामा किया। लेकिन इन सबके बीच ये समझना जरूरी हो जाता है कि आखिर भारत में अन्य जातियों की तुलना में दलितों की हालत कैसी है? क्या आज उनकी हालत में कुछ बदलाव आया है या फिर अब भी वो हाशिए पर हैं। इसे कुछ आकड़ों के जरिए समझते हैं।
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